Tag Archives: Urdu shayari

शायरी – तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई

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तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई
जो निभाना था घर से, वो वचन भूल गई

सात जनमों की भला कौन खबर रखे
तेरी दहलीज पे जब मैं ये जनम भूल गई

क्या जमाना भी करेगा हमसे शिकवा
जब जमाने के कीए सारे सितम भूल गई

दीवानी होकर तेरे पास चली आई हूं
तुमको देखा तो दिल की लगन भूल गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – जाने कैसा जादू किया है तूने मुझपे ओ कातिल

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प्यार की कोई हद समझना, मेरे बस की बात नहीं
दिल की बातों को न करना, मेरे बस की बात नहीं

कुछ तो बात है तुझमें तब तो दिल ये तुमपे मरता है
वरना यूँ ही जान गँवाना, मेरे बस की बात नहीं

जाने कैसा जादू किया है तूने मुझपे ओ कातिल
खंजर को सीने से हटाना, मेरे बस की बात नहीं

जब तक ये यकीं न हो कि मुझे सीने से लगाओगे
तब तक तेरे करीब जाना, मेरे बस की बात नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई

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हवा तो सर्द थी लेकिन सुलग रहा था कोई
चांदनी रात में तन्हा झलक रहा था कोई

हुआ है क्या शहर में उसे खबर ही नहीं
शराबे-इश्क को पीकर बहक रहा था कोई

मोड़ कितने ही मिले पर कहीं मुड़ा था नहीं
बस एक राह पे चलता सिसक रहा था कोई

किसी से उसका मरासिम रहा होगा शायद
यादों में डूबके आंखों से छलक रहा था कोई

(मरासिम-संबंध)

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – क्या मिला है मुझे इस दिल के आईने के सिवा

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क्या मिला है मुझे इस दिल के आईने के सिवा
क्या हुआ है मेरा गिर-गिर के टूटने के सिवा

देर हो जाएगी तुमको भी घर जाने तलक
तुमने भी सीखा है क्या मुसीबत उठाने के सिवा

दर्द कितना भी जहर उगले आंखों से मगर
हमको कुछ आया नहीं जख्म पे रोने के सिवा

आप आ ही गए आशिक का जनाजा ढोने
आप अपने हैं, क्या देंगे हमें कांधे के सिवा

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया

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मेरी राहों पे रहबर मुझे खींचता चला गया
मैं उसे देख न पाया और चलता चला गया

इन समाजों की जंजीरों में मन घुटता था
इसलिए भीड़ में मैं तन्हा होता चला गया

आपको देखकर भी पूछना तो भूल गया मैं
आपके बारे में ही दिल सोचता चला गया

मेरी दुनिया में बेखुदी थी मगर मैं न था
खबर थी कि जिंदा हूं पर मरता चला गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – हुस्न क्या चीज है, उन आंखों में डूबकर जाना

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हुस्न क्या चीज है, उन आंखों में डूबकर जाना
इश्क क्या होता है, अश्कों को बहाकर जाना

वो मुसलसल रहती है मेरे जिस्मो-जां में
अपने खयालों की किताबों को पढ़कर जाना

लुत्फ मिलता है गमे फिराक के मंजर में भी
हिज्र में चांद-सितारों के संग जागकर जाना

बुझ गया था वो चिराग मेरे जीवन का
मैंने शहनाई की आवाज को सुनकर जाना

गमे फिराक – जुदाई का गम
हिज्र – जुदाई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर

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जला रहा हूं ये दिल, कोई दीया तो मिले
हुए हैं खाक मगर हाय कहीं धुआं तो मिले

बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर
इसे बिछाऊंगा पर तेरा आशियां तो मिले

सजा रहा हूं कांटों को अपने गुलशन में
मेरे चमन को दीदार-ए-बहारां तो मिले

सजा-ए-मौत न मिल पाई इस मुजरिम को
मगर गुनाह की कोई दास्तां तो मिले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जो खो गया है वही बस है अपना, जो बचा है उसे वहम कहिए

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इसे मुहब्बत का दर्दो-गम कहिए
या बदनसीबों का कफन कहिए

जो खो गया है वही बस है अपना
जो बचा है उसे वहम कहिए

जब दीवारों में कोई अपना दिखे
उसे ही दुनिया में सनम कहिए

चाहत में जो आपके लिखता है गजल
ऐसे शायर को न बेरहम कहिए

©RajeevSingh

शायरी – मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में

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रू-ब-रू आते हैं वो माजी के आईने की तरह
हुस्न पर्दे से निकलकर निगाहों पे छा जाती है
उसके जलवों के आगोश में सांसें तो क्या
धड़कनों की रफ्तार भी बढ़ सी जाती है

मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में
अश्कों से लिखे गए कुछ नगमें हैं
जिन लम्हों ने दिए हैं ये जख्म के टुकड़े
उन टुकड़ों में बस तेरी ही परछाई है

मरहले शब के गुजरते हैं सजदे में तेरे
हर पहर तेरी इबादत में कट जाती है
ये जवानी के सितम हैं ओ मेरे सनम
तेरे इस दर्द को संजोने की कसम खाई है

मुझपे ऐतबार किया था तुमने एक दिन
तुम भले तोड़ दो, हम कभी न तोड़ेंगे
तेरे वादे, तेरे कसमों को चुन-चुनकर
अपने यादों की ये कलियां सजाई है

हमने सोचा न था कि एक दिन ये आएगा
तेरी यादों में बस अपनी बसर होनी है
ये हकीकत जब हमको नजर आई है
तेरी तस्वीर अपनी रूह पे बनाई है

©RajeevSingh

शायरी – राज ए मुहब्बत इज़हार के काबिल नहीं होता

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वक्त आने दो हकीकत भी बयां कर दूंगा
क्या छुपाना है तुमसे ओ मेरे दिलबर


अभी मसरूफ हो तुम अपनी ही उलझन में
मेरे जज़्बात को कहीं तुम न समझ लो पत्थर


राज-ए-मुहब्बत इज़हार के काबिल नहीं होता
दर्द-ए-खामोशी पढ़ लो तुम मेरी सूरत देखकर


इश्क की राह में लाकर तुझे परेशां क्यूं करूं
तेरी खुशी के लिए हम रो रहे हैं कहीं छुपकर


कैसे इज़हार करें, बड़ा डर लगता है मुझको
कहीं ठुकरा न दो तुम नादां की हरकत जानकर

©RajeevSingh

 

शायरी – तेरी खामोशी किसी सदमे की निशानी है

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तेरी खामोशी किसी सदमे की निशानी है
तेरी आंखों में गहरे जख्म का पानी है

जो गुलाबी बदन में दर्द को भर दे
उस कांटे का एक नाम बस जवानी है

इन खुली जुल्फों में आवारगी सी लगती है
तेरी बिखड़ी लटें तेरी तरह दीवानी है

रोग ऐसा है तो मरहम जाने क्या होगा
दिले-नादां की ये पीड़ भी अंजानी है

©RajeevSingh

शायरी – ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

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जिंदगी जख्म की तस्वीर बनके रह गई
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गई

मैं बना फिरता हूं दीवाना तेरे गम में
तू मेरे पैरों की जंजीर बनके रह गई

इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते
ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई

सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी
ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई

©RajeevSingh

शायरी – मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में

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सब कुछ है नसीब में, तेरा नाम नहीं है
दिन-रात की तन्हाई में आराम नहीं है

मैं चल पड़ा था घर से तेरी तलाश में
आगाज तो किया मगर अंजाम नहीं है

मेरी खताओं की सजा अब मौत ही सही
इसके सिवा तो कोई भी अरमान नहीं है

कहते हैं वो मेरी तरफ यूं ऊंगली उठाकर
इस शहर में इससे बड़ा बदनाम नहीं है

©RajeevSingh / love shayari