मुहब्बत की आग में जो जलके शायरी फोटो

मुहब्बत की आग शायरी फोटो

मुहब्बत की आग में जो जलके खाक हो चुके
उनमें भी कुछ धुएं को जगाते रहे हैं हम

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आधी अधूरी ख्वाहिशों के संग तन्हा, जीता रहा बहुत दिनों तक भटकते हुए तन्हा, अब दुनिया में जाने की मजबूरी है, कुछ पैसा उगाना भी जरूरी है। शायरी।

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